
कशिश मोल से बाहर निकल कर गाड़ी में बैठ गई। वो नमन की बातों को सोचने लगी। क्या नमन सच कह रहा था। नहीं विक्रांत बदल चुका था। कशिश खुद में ही उलझी हुई थी।
अचानक उसने ड्राइवर को गाड़ी होटल ताज की ओर ले जाने को बोलती ।

कशिश मोल से बाहर निकल कर गाड़ी में बैठ गई। वो नमन की बातों को सोचने लगी। क्या नमन सच कह रहा था। नहीं विक्रांत बदल चुका था। कशिश खुद में ही उलझी हुई थी।
अचानक उसने ड्राइवर को गाड़ी होटल ताज की ओर ले जाने को बोलती ।
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