
दूसरी ओर सुबह के 11 बज रहे थे
आयात और रिषभ अभी भी सो रहे थे। आयात की नींद खुलती है तो वह देखती है। रिषभ उसे पकड़ कर सोया हुआ था। रिषभ का एक हाथ माया के पेट पर था तो दूसरा माया के सिर के नीचे था।

दूसरी ओर सुबह के 11 बज रहे थे
आयात और रिषभ अभी भी सो रहे थे। आयात की नींद खुलती है तो वह देखती है। रिषभ उसे पकड़ कर सोया हुआ था। रिषभ का एक हाथ माया के पेट पर था तो दूसरा माया के सिर के नीचे था।
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