आह्ह, निया कबीर के हाथों पर अपनी हाथ रख दर्द से कराह उठी। उसकी आंखे बंद हो गई।
तुझे मैने माना किया था। यहां से भागना मत। ज्यादा प्यार से पेश आ गया में तेरे साथ इसलिए तेरे पर निकल आए। अब तुझे दिखाना पड़ेगा कबीर सिंग क्या चीज है। तूने मुझे हल्के में ले लिया।
कबीर का एक हाथ निया के बालों के मुट्ठी में थी दूसरे हाथों से उसने निया के जबड़े को कस कर पकड़ लिया था।
सोरी, दोबारा ऐसा नहीं होगा। छोड़ दीजिए मुझे दर्द हो रहा है। निया दर्द और डर से बोली।
तुझे लगता है में दोबारा तुझे ऐसा मौका दूंगा । इस कमरे में कैद रहेगी अब से तू । बोलते हुए कबीर की मुट्ठी उसके बालों ओर जबड़ों पर ओर टाइट हो गई।
प्लीज छोड़ दीजिए मुझे दोबारा ऐसी गलती नहीं नहीं होगी। निया की आंखों में आंसू थे।
ये आसू बहाना बेकार है तेरा। तेरा वह हाल करूंगा दोबारा चलने लायक नहीं रहेगी। एक झटके में कबीर ने उसे दूर झटक दिया।
निया सीधे बेड पर पीट के बल जा गिरी। दर्द से वो रो ने लगी।
कबीर को उसका रोना इरीटेट कर रही थी। उसने अपना माता सहलाते हुए। निया के पास आया। क्या समझ कर तू भागी थी यहां से। तूझे कितना प्यार से ट्रीट किया था मैने क्या कमी मिली तुझे यहां जो भागने का सोच।
निया का रोना कबीर को अच्छा नहीं लगा। उस पर हाथ उठाना भी अच्छा नहीं लगा। वो निया के पास लेट गया और उसे अपने बाहों में खींच लिया।
पता नहीं जबसे तू मेरे सामने आई है। मैं तुझे अपने आप से दूर नहीं करना चाहता। तेरे साथ मुझे बहुत अच्छा लगता है। कबीर प्यार से निया के गालों को सहलाने लगा। वो थोड़ा नर्म पड़ गया।
निया डर से चुप छाप लेटी रही वो कुछ नहीं कहती। कबीर कितना जालिम हैं ये अगर उसे पहले पता होता वो यहां से भागती नहीं। जब वो आज निया को घर लेकर आया था उसके आंखों के सामने कबीर ने उस ड्राइवर ओर घर की हेड मेड को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था। निया को अफसोस हो रहा था। उसके वजह से दो लोग मारे गए थे। ओर डर हद से ज्यादा होने लगी थी कबीर से।
कबीर उसे अब मौत का देवता लग रहा था। जो किसी बिना झिझक के किसी को भी मार देता था।
निया डर से कबीर के साथ चुप छाप लेटी थी। ओर कबीर उसे प्यार से सहला रहा था उसका प्यार करना भी निया को किसी से खौफ से कम नहीं लग रहा था। उसके दिल में कबीर के लिए डर बैठ गया था।
कबीर उसे खुद से थोड़ा दूर कर उसके ऊपर झुक गया। जैसे में कहता हूं उसी तरह रहोगी तो खुश रहोगी मुझे गुस्सा बहुत जल्दी आ जाता ओर मेरा गुस्सा तुम बर्दाश्त नहीं कर सकोगी।
कबीर की सांसे गर्म थी वो निया के गालों को बारी बारी चूमने लगा। निया इतनी ज्यादा खूबसूरत ओर गोरी थी कि रोने से उसका चेहरा पूरा रेड हो गया था। आंखे सूज गई थी और नाक भी पूरा रेड थी। जिससे वो ओर ज्यादा हसीन लग रही थी।
कबीर वैसे ही उस पर फिदा था ऊपर से निया का ऐसा फेस उसे खुद पर कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था। उसे हद से ज्यादा निया पर प्यार आने लगा। वो निया के गालों को चूमता तो कभी उसके आंखों को तो कभी उसके होठों को। कुछ देर बाद वो धीरे धीरे नीचे बढ़ने लगा ।
उसने निया के शर्ट के बटन खोल दिए। ब्लैक ब्रा में निया के परफेक्ट बूब्स उसके समाने थी। जिसे देख कर कबीर के मुंह में पानी आ गया। उसे इतना जल्दी थी उन्हें प्यार करने को कि वो सीधी ब्रा को ऊपर कर दिया जिससे निया के टाइट बूब्स उसके समाने नंगी थी।
ज्यादा देर न करते हुए कबीर ने दोनों बूब्स को अपने बड़े सख्त हाथों में थाम लिया और उसपर अपना चेहरा रगड़ने लगा। निया के मोटे मोटे निप्पल कबीर को ललचा ने पर मजबूर कर रही थी। वो राइट साइड के बूब्स पर अपना चेहरा रगड़ता ओर निप्पल को अपने मुंह भर कर किसी बच्चे की तरह चूसने लगा उसे सबसे ज्यादा निया का बूब्स चूसना अच्छा लगता था। निया का निप्पल काफी मोटा ओर खड़े थे। उन्हें चूसने में उसे काफी मजा आता था।
निया डर से कुछ नहीं करती वो चुप छाप लेटी थी और कबीर जो कर रहा था उसे करने दे रही थी। हालाकि उसे भी बहुत मजा आ रहा था कबीर का यू उसके बूब्स चूसना लेकिन डर ज्यादा हावी था उस पर। उसके हाथ पिलो पर कसे हुए थे। आह्ह के साथ उसने अपना चेहरा एक साइड से पिलो पर गड़ा दिया।
10 मिनट तक कबीर ने उसके राइट बूब्स को चूस चूस कर लाल कर दिया था। एक नजर उठा कर उसने निया को देखा। जान तुम्हारा ये बूब्स मुझे चूसना बहुत पसंद है। तुम्हे मजा आ रहा है ना। बोलो।
निया डर से अपना सिर हा में हिलाती। वैसे सच यह भी था उसे मजा तो आना ही था। किसी भी लड़की को ऐसा करना अच्छा तो लगेगा ही। उसके हा मिलते ही कबीर के आंखों में ओर नशा चढ़ गया।
वो झुका कर अपना चेहरा निया के लेफ्ट बूब्स पर रगड़ने लगा और निप्पल को मुंह में भर कर चूसने लगा।
उम्ममम उम्ममम उम्ममम आह्वाहन
प्लीज थोड़ा धीरे करिए मुझे दर्द हो रहा। सिसकते हुए निया बोली। ये दूसरी बार था जो कोई उसका बूब्स को चूस रहा था। नए नए अपने बॉडी के साथ कबीर का ऐसा खेलना उस दर्द तो होगा ही। ओर साथ में प्लेजर फील हो रहा था। आदत अभी भी नहीं हुई थी उसको कबीर की।
बर्दाश्त करना सिख लो मेरी जान। मुझे तो इन्हें रोज चूसना पीना है। चाहे दिन हो या रात जब भी मेरा मन करेगा इन्हें चूसूँगा ये बहुत छोटे हैं इन्हें मुझे बड़ा करना है। कबीर लगातार निया के बूब्स को दबा दबा कर चूसे जा रहा था। जैसे उनमें से मिल्क बाहर आ रहा हो।
नीचे से निया पूरी गीली हो गई थी। धीरे धीरे कबीर के एक हाथ नीचे बढ़ने लगे। उसने अपना हाथ निया के पेंटी के ऊपर रख दिया। ओर कस कर उसकी पूसी एरिया को मुट्ठी में भर लिया।
छोड़ दीजिए ना मुझे अजीब लग रहा है। निया अपने पैरों को मोड़ लेती। ओर थोड़ा इधर उधर हिलने लगती। कबीर उसके बूब्स को लगातार चूसे जा रहा था एक मिनट के लिए भी उसने उन्हें नहीं छोड़ा। जिससे निया मदहोश हो गई थी।
जान जो हो रहा होने दो मै सम्भाल रहा हूं ना। तुम बस एंजॉय करो। उसका हाथ निया के पेंटी पर चल रहे थे। यह तुम्हारे बूब्स चूसने में कितना मजा आ रहा इसका नशा चढ़ रहा मुझ पर। जब तक मेरा मन नहीं भरता इन्हें चूसता रहूंगा। कबीर 1घंटे तक निया के बूब्स को चूसता रहा।
इन्हें चूसने में जो मजा वो ओर किसी चीज में नहीं। इन्हें ओर बड़ा करना पड़ेगा कोई बात नहीं दिन रात तो अभ इन्हें ही चूसना ओर तुम्हे चोदना मेरा काम है। बोलते कबीर निया को देखता।
कितना बेशरम आदमी है। ऐसी बाते कैसे कर लेता है। निया मन में सोचने लगी। तभी उसे अपने नीचे कुछ हलचल हुई। कबीर निया की पेंटी खींच कर उतार रहा था।
निया डर से थोड़ा ऊपर सरकने लगी। मुझे गुस्सा मत दिलाओ क्या करने की कोशिश कर रही। सेक्स के टाइम ऐसे नखरे दिखाना बिल्कुल पसंद नहीं मुझे। कबीर निया के गोरे गोल मोटल पैरों को खींच कर अपने नीचे ले आया। मुझे डिस्टर्ब नहीं चाहिए। वो झुका और अपना जीव निया के गीली पूसी चलाने लगा।
अल्लाह्यान्न उम्ममम निया प्लेजर से मुंह पर हाथ रख रोने लगी। वो एक दम बेचैन होने लगी।
कबीर को जैसे दुनिया मिल गई हो। वो निया की गीली पूसी खाने में बीजी था। वैसे उसके लिए यह सब नई बात नहीं थी। हजारों लड़की के साथ वो इंटिमेट हो चुका था। निया अलग थी। निया के साथ उसे जो सुकून मिल रहा था वो कही ओर नहीं था अब तक।
कबीर निया के पूसी को ऐसे चाट रहा था जैसे कोई मलाई से भरा कटोरा। तुम्हारी चुट इतना टेस्टी है मन करता है इसे पूरी खा जाऊ। कबीर के दोनों हाथ निया के पैरों को ऊपर उठा रखा था। वो झुक कर निया के छूट को कभी खाने लगता तो कभी चाटता
निया को तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा ये क्या हो रहा उसके साथ। कितना अलग एक अजीब सी फिलिंग थी ये। जो उसके बर्दाश्त से बाहर थी।
To be continued
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