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कबीर आलिया इंटिमेट

कबीर आलिया को खड़े खड़े चोदने लगा। आलिया को इससे काफी दर्द हो रहा था। लेकिन उसे उतना मजा भी आ रहा था।

ओहह्ह्ह सर इट्स अमेजिंग ओर फर्स्ट आलिया चिल्लाने लगी। कबीर की बॉडी काफी सख्त थी जिसमे आलिया किसी बच्ची की तरह उछल रही थी।

बेबी तुम काफी गीली हो रही हो। चलो बेड पर तुम्हारे पानी सुखाते है। कबीर बिना रुके आलिया को चोदते हुए बेड पर ले आया। आलिया बेड पर आते ही कबीर को अपने बाहों मे पूरा कस लेती। उसके टांगे कबीर कि कमर पर अभी भी कस कर लपटे हुए थे। कबीर उसी पोजिशन में आलिया को चोदने लगा।

तुम्हारी पूसी काफी अच्छी है। इसे रात भर लूंगा बोलते हुए कबीर के झटके लंबे लंबे होने लगे। आलिया मस्ती में चिल्लाने लगी।

ओहह्ह्ह सर आपके भी डिक काफी बड़ा है। इसने तो मेरी जान ले ली। मुझे ओर चाहिए आप रुकिए मत बस देते जाइए । पूरी रात इसे लेना चाहती हूं अपनी पूसी में। आलिया अपनी कमर उठाने लगी ।।।

कबीर का भारी साइज पूरी तरह से आलिया अपनी पूसी में ले रही थी। कबीर की स्पिट किसी मशीन की तरह थी। आलिया सुकून की सिसकियां ले रही थीं। उसे काफी ज्यादा मजे दे रहा था कबीर का वो 12 इंच डिक। अब तो आलिया पागल हो रही थी कबीर के इतना हार्ड सेक्स से।।

ओहह्ह्ह उम्मम उन्ननन बहुत अच्छा सर क्या कमाल का स्टेमिना है आपका। मुझे ऐसीही मर्द पसंद है। काश रोज आप मुझे ऐसे देते । आलिया की पूसी गीली से सुख चुकी थी फिर भी कबीर को वो छोड़ना नहीं चाहती थी। कबीर का डिक उसे काफी मजेदार लग रही थी।

वो बार बार कम हो रही थी और बार उसका कम कबीर की डिक से सुख रही थी। आलिया पीछे नहीं हटना चाहती थी वो कबीर रियलाइज नहीं करा सकती वो थक गई है। काफी देर से दोनों इंटिमेट हो रहे थे। आलिया की पूसी सूज गई थी। उसे अब थोड़ा थोड़ा दर्द भी हो रहा था।

अब तक वो बर्दाश्त इसलिए कर रही थी कबीर एक बार भी कम नहीं हुआ था। उसे कबीर की स्पर्म अपने खोख में चाहिए था। लेकिन कबीर ऐसा तो बिल्कुल नहीं करने वाला था। ये शायद आलिया नहीं जानती थी।

लगातार दो घंटे से कबीर उसके साथ सेक्स कर रहा था लेकिन एक बार भी वो कम नहीं हुआ था। आलिया कि मोन अब दर्द में बदल गई। सर जल्दी कीजिए बर्दाश्त नहीं हो रहा। आलिया दर्द से बोली।

क्यों तुम तो पूरी रात मेरा डिक लेना चाहती थी अब क्या हुआ कबीर कि होठों पर डेविल मुसकान थी।

मुझे कोई प्रॉबलम नहीं है इसी तरह रात भर तुम्हे देता रहूंगा। वो ओर ज्यादा हार्ड हो गया कबीर समझ चुका आलिया अब उसे ओर बर्दाश्त नहीं कर सकती। फिर भी वह रुका नहीं।

तुम्हारी पूसी सूज गई। ओर सुख भी गई। ये लार टपकना बंद कर दिया । अब ये मेरी किसी काम की नहीं है। मुझे मज़ा नहीं आ रहा। बोलते हुए कबीर उसे डोगी स्टाइल मे आलिया के गाड़ में सेट कर दिया।

No sar ये बहुत ही बड़ा है मैं बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगी। आलिया डर से रोने लगी।

ओर सही भी है कबीर का साइज इतना बड़ा था कोई भी बर्दाश्त नहीं कर सकता था। लेकिन कबीर कहा मानने वाला था।

नाटक करना बंद कर। नहीं तो तेरे टुकड़े टुकड़े कर किसी जानवर को खिला दूंगा। सेक्स के टाइम मुझे कोई डिस्टर्ब नहीं चाहिए । एक जोरदार धक्के के साथ आलिया की चीख कमरे में गूंज उठी।

सर पिल्स छोड़ दीजिए मुझे दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा। ये काफी ज्यादा बड़ा है। मै इसे अपने मुंह में ले लूंगी। ओर आपको सेटिस्फाई कर दूंगी पिल्स इसे बाहर निकाल दीजिए मैं मर जाऊंगी पिल्स सर। आलिया गिड़गिड़ाने लगी।

बहुत ज्यादा नाटक करती हैं तू। पहले तो तेरी लार टपक रही थी अब क्या हुआ फट गई। अब चुप कर ओर mujhe करने दे। नहीं तो तेरी वो हाल करूंगा दोबारा चल नहीं पाएगी।

कबीर आलिया के बाल को कस कर पकड़ लेता ओर अपनी डिक को आलिया गाड़ पर मूव करने लगता।

दूसरी ओर

कबीर के बंगलों से एक कार बाहर निकली। शायद वो कार किसी ड्राइवर चला रहा था। वो कार एक जगह आ कर रुकी। ड्राइवर के निकलते ही कार कि डिकी से निया बाहर निकली।

इधर उधर देख कर निया भागने हुए एक गली में घुस गई। उस ड्राइवर को थोड़ा भी अंदाजा नहीं था उसके कार में निया छुपी हुई यहां तक आई है।

भागते हुए निया पीछे देख रही थी। भागते भागते वो एक घर के सामने आ कर रुकी। ये उसकी टीचर कि घर थी जो शायद उसे भी पता नहीं था। उसे तो बस आज छुपने कि कोई जगह मिले। सुबह होते ही वह अपने घर जा पाएगी।

रात के 1 बजे उस घर कि मेन डोर बंध थी। वह इधर उधर देखती। जब कोई डोर खिड़की खुली नहीं मिली तो वो घर के पीछे चली गई। ओर थोड़े समय रुकने के लिए जगह ढूंढने लगी थोड़ी देर शांत से बैठ सके। उसे डर भी लग रहा था कबीर के ड्राइवर उस तक न पहुंच जाए। पीछे के हिस्से में उसे एक स्टोर रूम जैसी कोई कमरा मिल गया वो डरते हुए उस स्टोर रूम में चली गई। ओर एक कोने में बैठ गई। वो काफी हद तक डरी हुई थी।

इधर

कबीर आलिया के साथ पूरे जोश से इंटिमेट हो रहा। आलिया दर्द से चीख रही थी। उसका दर्द समय के साथ बढ़ता जा रहा था। लेकिन कबीर को उससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। वो अपने आप को सेटिस्फाई करने में लगा हुआ था।

पूरे 4 घंटे के बाद कबीर आलिया से दूर हुआ। ओर उठ कर वाशरूम चला गया। आलिया का हाल बहुत बुरा था। वो बेहोश बेड पर पड़ी रही।

सुबह के 6 बजे कबीर की कार उसके बंगलों के आगे आ कर रुकी। उसका चेहरा काफी ख़तरनाक लग रहा था। वो घर के अंदर आया और सीधे अपने कमरे में दाखिल हुआ। रूम के बेड पर नजर पड़ते ही उसकी लाल आंखे ओर कठोर हो गई। कुछ ही समय में उसे पता चल चुका था निया भाग गई है उसका गुस्सा सातवें आसमान पर था।

निया को ढूंढने अपनी आदमियों को लगा दिया।

दूसरी ओर सुबह होते ही निया उस स्टोर रूम से बाहर निकली उसका सामना अपने टीचर से हुआ जो वर्क करते हुए इधर से जा रहे थे।

निया को देखते ही उसकी आंखे बड़ी हो गई। निया तुम ओर मेरे स्टोर रूम में क्या कर रही थी। हैरानी से वो निया को देखता। निया से कुछ कहा नहीं जा रहा था उसकी आंखे में आसू थे।

टीचर को निया की हालत ठीक नहीं लगी वो आगे कुछ नहीं पूछते। ओर निया को अपने साथ घर की अंदर ले आते।

दो दिन बाद

सर मुझे छोड़ दीजिए। मुझे नहीं पता था वो आपसे रिलेटिव है। नहीं तो आप को में पहले ही इनफॉर्म कर देता। सर इसमें मेरे कोई हाथ नहीं है। मुझे जाने दीजिए। टीचर कबीर के आगे घुटने टेक कर अपनी गलती का माफी मांग रहे थे।

उस टीचर के घर को चारों ओर से कबीर के आदमियों ने घेर लिया था। जैसे वो कोई मुजरिम हो जेल से फरार हुआ हो।

दो दिन मेरा वेस्ट हुआ है। इसकी भर पाई कौन करेगा। कबीर कि ख़तरनाक आवाज गूंज उठी उस खाली हाल में। जब से निया गायब हुई थी तब से कबीर के आदमी किसी कुत्ते की तरह निया को ढूंढने में लगे हुए थे। ओर कबीर की आंखों से नींद गायब थी। सीसीटीवी कैमरे से उसे निया का पता चला।

तुझे तो ऐसी मौत दूंगा फिर कभी इंसान पैदा नहीं होगा। बोलते हुए कबीर अपने आदमियों को इशारा करता ओर खुद वहा बाहर निकल गया।

अब तो उसे निया से भी निपटा बाकि था। निया का हाल क्या होगा ये तो निया खुद भी नहीं जानती थी। क्यों कि कबीर ने अब तक उससे कोई सवाल नहीं किया था।

कमरे में निया बेड पर डरी सहमी बैठी हुई थीं। डोर लोक था बाहर से जो कबीर की फिंगरपेंट से खुलता था। अब कबीर शायद ही वो डोर अनलॉक रखेगा उसके गैर मौजूदगी में।

कबीर अपने कदम लंबी लंबी लेते हुए डोर को एक झटके में खुलता है। उसकी कठोर आंखे गुस्से से ओर लाल हो गई थी। उसकी नजर बेड पर बैठी निया पर थी।

निया कबीर की आंखों को देखते ही डर से झुक लेती। उसे कबीर से काफी डर लग रहा था।

क्यों भागी थी तुझे मैने माना किया था ना यहां से भागना मत फिर क्यों भागी थी। तुझे क्या लगा था तू मुझसे भाग निकलेगी तुझे में ढूंढ नहीं सकता। तूने मुझे गली का मवाली गुंडा समझा है क्या कबीर सिंग नाम है मेरा जो मुझे पसंद आ जाए उसे मुझसे कोई नहीं बचा सकता।

कबीर निया कि बालों को पीछे से जोर से खींचते हुए मुट्ठी में भर लेता। जिससे निया का चेहरा कबीर के चेहरे के एक दम क़रीब थी। कबीर की आंखे आग उगल रही थी।

To be continued

यार कॉमेंट कर दिया करो नेक्स्ट चैप्टर के लिए 🙁

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